हमारी खाने की आदतें

हमारे देश में  खाने के बहुत सारे प्रकार  उपलब्ध है | यहाँ तक पूरे साल स्ट्राबेरी भी उपलब्ध है  क्योंकि बहुत सारी खाद्य सामग्रियां दूसरी जगहों से आते हैं| उदाहरण के लिए-  अभी हमारा टमाटर केलीफ़ोर्निया से आ रहा है और केलें थाईलैंड से आ रहे हैं | आस-पास में  कम ही खाद्य सामग्री उपलब्ध है| सुपर मार्किट में हमारे लिए बहुत से विकल्प है और हम बहुत ज्यादा खाद्य सामग्रियां खरीदते हैं | मुझे लगता है कि यह ठीक नहीं है | एक दूसरी परेशानी  यह है कि हर हफ्ते थोड़ा खाना हमारे फ्रिज में ख़राब होता है| 

मेरी एक ख़राब आदत है |आज रात मुझे भूख लगी और  मैंने देखा कि फ्रिज में मेरा पिछले दिनों का बचा हुआ चावल और मसूर दाल रखी है|  मैंने सोचा मुझे फिर से मसूर दाल और चावल नहीं खाना चाहिए| मुझे कुछ और खाना चाहिए| अधिकतर मैं कुछ नया खाना बनाता हूँ और एक दो दिनों के बाद बचे हुए खाने को कचरे में डाल देता  हूँ चूंकि महामारी फैली है इसलिए आज मैंने सोचा कि मैं सुपर मार्किट न जाकर केवल दाल चावल ही खाऊँ|   

हमारे देश में लगभग साठ प्रतिशत खाना कचरे में जाता है| कुछ सामग्रियां  सुपर मार्किट में और कुछ घरों में ख़राब होती हैं| यह बात थोड़ी शर्मिंदा करने वाली है क्योंकि बहुत से लोग हमारे शहर में भूखे हैं| मैं सोचता हूँ कि मैं बदलूं और हमारी संस्कृति भी बदले|

4 thoughts on “हमारी खाने की आदतें

    1. We sure have been! After all we can’t just be going out every two days for food like we used to. (But of course some of that was just the nature of our shopping – buying fresh food only as needed)

Share your thoughts!

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.